"भारत में गरीब एक गिनी पिग की तरह"

भारतीय ट्रेन विश्व के सबसे बड़े चुनिंदा रेल नेटवर्क में से एक है।
भारतीय सवारी ट्रेनों का स्ट्रक्चर लगभग एक जैसा सा होता है, यानी इंजन के बाद में या फिर सबसे लास्ट में जनरल डिब्बे और बीच में AC-3, AC-2 AC–1 और फिर स्लीपर कोच लगे होते हैं. लेकिन, क्या कभी आपने ये सोचा है कि आखिर किस वजह से सिटिंग एरेंजमेंट कॉमन होता है.
रेलवे की मानें तो वो कहते हैं की सुरक्षा की दृष्टि से ऐसा किया जाता है ताकि आपात काल की स्थिति में लोगों को बचाया जा सके, क्राउड मैनेजमेंट किया जा सके।
लेकिन कहानी जस्ट उलट है, एक्सपर्ट का कहना है की बोगियों की पोजिशन में आगे और पीछे जनरल और ठीक बाद में स्लीपर रखे जाते हैं, बीच में AC के कोच होते हैं। इसका कारण टिकिट के मूल्य के आधार पर दी जाने वाली सुरक्षा महत्वपूर्ण कारक है।
जब भी ट्रेन दुर्घटना ग्रस्त होती है चाहे आगे से हो या पीछे से तो मध्य में स्थिति AC कोच के यात्रियों को कम नुकसान पहुंचे।
देश में एकता समानता सब थोथी बातें तब लगती हैं जब सरकारी तंत्रों में भी दुराभाव पैसे और गरीबी के आधार पर किया जाता है यह विचारणीय है।
सिस्टम चेंज करने की बात सभी करते हैं लेकिन करता कोई नहीं और कुर्बानी जनता की ही ली जाती है यही सत्य है, क्योंकि गरीब जनता देश में गिनी पिग है जिसका रोज न रोज कहीं ट्रायल चलता रहता है।

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